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इंदौर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बिना परमिट Rapido, Ola, Uber बाइक टैक्सी गैरकानूनी धारा 66

इंदौर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

इंदौर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला देते हुए बिना परमिट बाइक टैक्सी को गैरकानूनी बताया है। Rapido, Ola, Uber जैसी कंपनियों पर असर पड़ेगा। जानिए नया नियम, धारा 66 और पूरा मामला।

इंदौर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। इंदौर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने साफ कहा है कि निजी दोपहिया वाहन (बाइक) का पब्लिक ट्रांसपोर्ट के रूप में उपयोग करना कानून के खिलाफ है, यदि उसके पास वैध परमिट नहीं है।
कोर्ट ने राज्य सरकार और परिवहन विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे कानून का पालन सुनिश्चित करें और बिना परमिट चल रही बाइक टैक्सी सेवाओं पर उचित कार्रवाई करें। यह फैसला खासतौर पर उन कंपनियों पर असर डाल सकता है जो बाइक टैक्सी सेवा दे रही हैं।

मामला क्या है और क्यों आया कोर्ट में?

इंदौर शहर में पिछले कुछ वर्षों से Rapido, Uber और Ola जैसी ट्रांसपोर्ट एग्रीगेटर कंपनियां बाइक टैक्सी सेवा चला रही हैं। इन सेवाओं में निजी नंबर प्लेट (White Plate) वाली बाइक का उपयोग किया जा रहा है।
समस्या यह है कि:

  • ये बाइक निजी वाहन के रूप में रजिस्टर्ड होती हैं
  • इनके पास पब्लिक ट्रांसपोर्ट का परमिट नहीं होता
  • फिर भी इनका उपयोग किराए पर सवारी ढोने के लिए किया जा रहा है

Motor Vehicles Act की धारा 66 क्या कहती है?

कोर्ट ने अपने फैसले में Motor Vehicles Act की धारा 66 का हवाला दिया।
इस धारा के अनुसार:

  • कोई भी वाहन पब्लिक ट्रांसपोर्ट के रूप में तभी इस्तेमाल हो सकता है जब उसके पास वैध परमिट हो
  • बिना परमिट के सवारी ढोना गैरकानूनी है
  • निजी वाहन का व्यावसायिक उपयोग कानून का उल्लंघन है

बाइक टैक्सी पर क्यों हो रही है सख्ती?

इंदौर में बाइक टैक्सी सेवा तेजी से लोकप्रिय हो रही थी क्योंकि:

  • किराया ऑटो और कैब से सस्ता होता है
  • ट्रैफिक में जल्दी पहुंचना आसान होता है
  • युवाओं के लिए रोजगार का साधन बन गया था

लेकिन कानूनी दृष्टि से ये सेवाएं पूरी तरह नियमों के अनुरूप नहीं थीं। कई बाइक ड्राइवर बिना कमर्शियल लाइसेंस और परमिट के काम कर रहे थे।
कोर्ट ने कहा कि कानून का पालन करना जरूरी है और निजी वाहन को सीधे पब्लिक ट्रांसपोर्ट में बदलना नियमों के खिलाफ है।

राज्य सरकार और परिवहन विभाग को क्या निर्देश दिए गए?

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और परिवहन विभाग को निर्देश दिए हैं कि:

  • बिना परमिट चल रही बाइक टैक्सी सेवाओं की जांच करें
  • नियमों का सख्ती से पालन करवाएं
  • गैरकानूनी तरीके से चल रही सेवाओं पर कार्रवाई करें
  • भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए स्पष्ट नियम बनाएं

निष्कर्ष

इंदौर हाईकोर्ट बाइक टैक्सी फैसला मध्यप्रदेश के ट्रांसपोर्ट सिस्टम के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि बिना परमिट बाइक से सवारी ढोना गैरकानूनी है और कानून का पालन करना जरूरी है।
अब राज्य सरकार और परिवहन विभाग की जिम्मेदारी है कि वे स्पष्ट नियम बनाएं और उनका पालन सुनिश्चित करें। आने वाले समय में बाइक टैक्सी सेवाओं को लेकर नए नियम और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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