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जया एकादशी व्रत कथा: 2026 आज कौन सी एकादशी है? जानिए, पूजा विधि और सही तिथि

जया एकादशी व्रत कथा

जया एकादशी व्रत कथा कब है? आज कौन सी एकादशी है, व्रत कथा, पूजा विधि और व्रत पारण का सही समय यहाँ सरल हिंदी में जानिए।

जया एकादशी व्रत कथा एकादशी क्या है?

एकादशी हिंदू धर्म में एक बेहद पवित्र तिथि है, जो प्रत्येक चंद्र मास में दो बार आती है — शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में।संख्या में यह चंद्र माह की ग्यारहवीं (11वीं) तिथि होती है। इस दिन का व्रत रखने से पापों का नाश, मानसिक शांति और आत्म-शुद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु/कृष्ण की उपासना सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है

आज कौन सी एकादशी है और एकादशी कब है?

आज, 29 जनवरी 2026 को माघ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी मनाई जा रही है, जिसे जया एकादशी कहा जाता है।

जया एकादशी 2026 व्रत तिथि:

जया एकादशी व्रत का महत्व और कथा

बहुत समय पहले, पृथ्वीराज नाम का एक राजा बहुत शक्तिशाली और संपन्न था। लेकिन फिर भी उसको मन की शांति और आत्म-सन्तोष नहीं मिलता था। उसने अपने गुरु से पूछा — “मैं शक्तिशाली और धनवान हूँ फिर भी जीवन में संतोष क्यों नहीं?” गुरु कहने लगे, “राजन, तुम्हारा मन अभी भी पाप, अहंकार और लालसा से उपजे कर्मों में उलझा है। केवल भगवान विष्णु की भक्ति से ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है।

”गुरु ने आगे बताया कि माघ शुक्ल पक्ष की जया एकादशी का व्रत निरंतर श्रद्धा से करने पर मनुष्य के पाप नष्ट होते हैं, बुद्धि शुद्ध होती है और जीवन में विजय, समृद्धि एवं आनंद की प्राप्ति होती है। राजा ने श्रद्धापूर्वक जया एकादशी व्रत रखा और अनुभव किया कि उसके जीवन में शांति, सफलता और दिव्य कृपा आयी।

जया एकादशी व्रत की पूजा विधि

1. व्रत का संकल्प

सुबह उठकर स्वच्छ स्नान करें, भगवान विष्णु/कृष्ण की प्रतिमा या चित्र के सामने विधिवत संकल्प लें।
दूसरे शब्दों में:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” के उच्चारण के साथ प्रण लें कि आप व्रत ईमानदारी से रखेंगे।

. 2. उपवास (Fast)

जया एकादशी में व्रत दो प्रकार से किया जाता

. 3. पूजा विधि

. 4. ब्रेक फ़ास्ट (Parana)

द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद ही व्रत का पारण करें — प्रायः 30 जनवरी 2026 सुबह 7:10 से 9:20 बजे तक।

जया एकादशी व्रत के लाभ

निष्कर्ष

आज सही अर्थ में 29 जनवरी 2026 को जया एकादशी का व्रत है।

यह दिन आत्म-शक्ति, विजय, पवित्रता और भगवान विष्णु की कृपा का प्रतीक है। सही नियम, कथा, पूजा विधि और समय के साथ जब आप यह व्रत करेंगे — तो यह ना केवल धार्मिक रस देगा, बल्कि जीवन में सकारात्मक परिवर्तन भी लाएगा।

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