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कोलकाता में टूटा 47 साल पुराना रिकॉर्ड: सितंबर की तीसरी सबसे भारी बारिश, शहर डूबा, जनजीवन ठप

कोलकाता में टूटा 47 साल पुराना रिकॉर्ड: सितंबर की तीसरी सबसे भारी बारिश, शहर डूबा, जनजीवन ठप

कोलकाता (Kolkata) में सितंबर 2025 की बारिश ने पिछले कई दशकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। 1978 के बाद यह तीसरी सबसे भारी एक दिन की बारिश दर्ज की गई। लगातार हुई मूसलाधार बारिश ने न केवल सड़कों को नदी में बदल दिया बल्कि बाढ़, जलजमाव और हवाई सेवाओं पर भी गंभीर असर डाला

बारिश का आंकड़ा और रिकॉर्ड

मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 24 घंटे में कोलकाता में करीब 200 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई।

यह सितंबर महीने की तीसरी सबसे अधिक एक दिन की बारिश है।

1978 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब इतनी तेज़ बारिश ने शहर को लगभग ठप कर दिया।

जनजीवन पर असर

सड़कें जलमग्न हो गईं, कई जगह पानी कमर तक भर गया।

ट्रैफिक जाम और वाहनों की लंबी कतारों ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं।

हवाई अड्डा (Netaji Subhas Chandra Bose International Airport) पर कई उड़ानें रद्द और डायवर्ट करनी पड़ीं।

स्थानीय ट्रेन और मेट्रो सेवाओं पर भी असर पड़ा।

अस्पतालों और स्कूलों में पानी घुसने की खबरें भी सामने आईं।


प्रशासन की तैयारी और राहत कार्य

पश्चिम बंगाल सरकार ने तुरंत आपातकालीन बैठक बुलाई।

नगर निगम (KMC) की टीमें जल निकासी के लिए पंपिंग स्टेशनों पर तैनात की गईं।

कई इलाकों में NDRF और SDRF की टीमें बचाव कार्य में लगीं।

बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने स्कूल और कॉलेज बंद रखने का ऐलान किया।


मौसम विभाग की चेतावनी

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले 24 घंटों के लिए भारी बारिश की संभावना जताई है।

आसपास के जिलों हुगली, हावड़ा, दक्षिण 24 परगना और उत्तर 24 परगना में भी रेड अलर्ट जारी किया गया।

मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।


कोलकाता की बारिश का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

1978 में कोलकाता में भयंकर बाढ़ आई थी, जब शहर कई दिनों तक पानी में डूबा रहा।

2025 की यह बारिश उस घटना की याद दिलाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और अनियोजित शहरीकरण (Urbanization) के कारण इस तरह की आपदाएँ और अधिक गंभीर होती जा रही हैं।


स्थानीय लोगों की परेशानियाँ

आम नागरिकों ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो शेयर किए जिनमें कार, बस और ऑटो पानी में फंसे दिख रहे हैं।

कई इलाकों में बिजली कटौती करनी पड़ी।

बाजार बंद हो गए और दैनिक जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।


निष्कर्ष

कोलकाता की यह बारिश एक बार फिर से यह साबित करती है कि प्राकृतिक आपदाओं के सामने शहरी व्यवस्था कितनी कमजोर है। सरकार और प्रशासन को बेहतर जल निकासी सिस्टम, जलवायु परिवर्तन पर गंभीर नीति और आपदा प्रबंधन पर अधिक ध्यान देना होगा।

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