इंदौर (बंगाली स्क्वायर) — मंगलवार को एक आम-सी ड्राइविंग रूटीन अचानक खौफनाक हादसे में बदल गई, जब एक चलती हुई कार में बीच सड़क पर अचानक आग भड़क उठी। जिस वक्त कार धू-धू कर जलने लगी, वहां अचानक हड़कंप मच गया। गनीमत रही कि कार में बैठे यात्री जल्द ही सुरक्षित बाहर निकल आए, अन्यथा यह मामूली “वायरिंग कटने” की घटना बड़ी आपदा में बदल सकती थी।

पुलिस व फायर ब्रिगेड को घटना की सूचना मिलते ही तुरंत मौके पर पहुंची, लेकिन आग इतनी जल्दी फैल चुकी थी कि कार आधे से ज्यादा जल चुकी थी। शुरुआती जांच में सामने आया कि इस भयावह हादसे का कारण था — इंजन कम्पार्टमेंट में लगी वायरिंग को किसी चूहे (रैट/माउस) द्वारा काट देना।
हाल की घटनाएँ: यह समस्या सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं
पहले भी कई शहरों से ऐसी शिकायतें आई हैं कि चूहों ने कार की तारों को काटा और ड्राइवरों को सफर के दौरान इंजन स्टार्ट न होने या इलेक्ट्रिकल फॉल्ट का सामना करना पड़ा।
अक्सर वो कारें जिनकी पार्किंग गंदे या खुले किनारे-कच्चे इलाकों में होती है — चूहों की पहुँच के लिए आसान होती हैं।
कुछ बीमा कम्पनियाँ (विशेष रूप से Comprehensive car-insurance व “रैट कवर” + add-ons) समय-समय पर ऐसे मामलों के लिए कवरेज ऑफर करती हैं, क्योंकि यह एक सामान्य नुकसान का कारण बन चुका है।
इसलिए यह समस्या न सिर्फ ड्राइवर की लापरवाही, बल्कि पर्यावरण/पार्किंग की स्थिति, बीमा विकल्प, और नियमित देख-रेख की कमी का निहित परिणाम हो सकती है।
क्यों कार की वायरिंग चूहों के लिए आकर्षक होती है
आधुनिक कारों में इस्तेमाल की जाने वाली वायरिंग इंसुलेशन — यानी तारों को लपेटने वाला प्लास्टिक/रबड़ — कभी-कभी सोया (soy) या पौधे-आधारित सामग्री से बना होता है, जो चूहों को चबाने के लिए आकर्षित करता है।
चूहे व अन्य Rodents अपने दांतों को पाले रखने (ग्रूमिंग) के लिए लगातार कुछ न कुछ चबाते रहते हैं, और कार की वायरिंग उनके लिए आसान निशाना बन जाती है।
एक बार वायरिंग की इंसुलेशन काट दी जाए — तो इंजीनियरिंग सर्किट शॉर्ट सर्किट बना सकता है, जिससे फ्यूज़ उड़ सकते हैं, शॉर्ट-सर्किट के कारण चिंगारी लग सकती है, और आग भी लग सकती है।
यानी — चूहों के काटने को छोटी-सी हरकत समझना बड़ी भूल हो सकती है।
कैसे बचें: अपनी कार की सुरक्षित रख-रखाव के लिए जरूरी सुझाव
अगर आप चाहते हैं कि आपकी कार और उसमें बैठे लोग सुरक्षित रहें, तो नीचे दिए सुझावों को अपनाएँ:
इंजन कम-पार्टमेंट व कार की वायरिंग की नियमित जाँच करें — खासतौर से अगर आप गाड़ी कई दिनों तक पार्क करके रखते हैं। तारों की इंसुलेशन और कनेक्शनों (harness) की जाँच जरुरी है।
कार की पार्किंग सही जगह करें — गंदगी, कूड़ा-करकट, कूड़ेदान, जंगली पेड़-पौधे या बंद-अंधेरी पार्किंग स्पॉट जहाँ चूहों की संभावना हो, वहाँ से बचें।
रैट-प्रति उपाय अपनाएँ: यदि आप पार्किंग गैरेज या कार खड़ी करने की जगह नियमित रखते हैं — तो उस जगह को साफ रखें, कूड़ा न रखें। चूहों के प्रवेश वाले ठिकानों (छत, दीवार के दरार, नालियों आदि) को बंद/सील करें।
रैपेलेंट्स या अल्ट्रासोनिक रैपेलेंट डिवाइसेस का उपयोग करें — कुछ स्प्रे, ग्रैन्यूल, या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बाजार में उपलब्ध हैं, जो चूहों को दूर रखने में मदद करते हैं।
बीमा व गाड़ी इंश्योरेंस पर विचार करें — अगर संभव हो, तो Comprehensive insurance लें जिसमें Rodent / Wildlife damage का कवरेज हो। इससे अप्रत्याशित क्षति होने पर आर्थिक सुरक्षा मिलती है।
निष्कर्ष — लापरवाही नहीं, सतर्कता ज़रूरी
इस दिन-प्रतिदिन की छोटी-सी लापरवाही — जैसे, कार को किसी अंधेरी गंदी जगह पर पार्क करके छोड़ देना — कभी भी बड़ी दुर्घटना में बदल सकती है। मंगलवार की घटना इस बात की सख्त याद दिलाती है कि सिर्फ चालान, ड्राइविंग या रफ्तार ही नहीं, बल्कि कार के रख-रखाव — खासकर वायरिंग और इंजन सुरक्षा — की भी बराबर जिम्मेदारी है।
अगर आप इन बातों पर थोड़ा भी ध्यान दें — नियमित देख-भाल, साफ-सफाई, सही पार्किंग, व रैट सुरक्षा — तो अक्सर अनजान खतरों से बचा जा सकता है।



