इंदौर दूषित पानी मामला के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से उल्टी-दस्त की बीमारी फैली, जिससे कई लोगों की मौत की आशंका है। हाईकोर्ट में सरकार की रिपोर्ट के बाद जल संकट और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए
इंदौर दूषित पानी मामला
हाईकोर्ट में क्या पेश हुई सरकार की रिपोर्ट?
यह मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई के तहत है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की खंडपीठ दूषित पानी से हुई कथित मौतों को लेकर दायर कई जनहित याचिकाओं (PIL) की सुनवाई कर रही है।
राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के अनुसार,28 दिसंबर से 12 जनवरी के बीच भागीरथपुरा में सात लोगों की मौत हुई है।
मृतकों की पहचान और उम्र
सरकारी रिकॉर्ड में जिन सात लोगों की मौत दर्ज की गई है, उनके नाम इस प्रकार हैं:
उर्मिला (60 वर्ष),तारा (65 वर्ष),नंदलाल (70 वर्ष),हीरालाल (65 वर्ष),भगवान भामे (73 वर्ष),अरविंद निखार (43 वर्ष)पांच महीने का शिशु अव्यान
रिपोर्ट के मुताबिक, चार लोगों की मौत इलाज के दौरान हुई, जबकि एक व्यक्ति को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया। शिशु और 43 वर्षीय व्यक्ति की मौत का कारण “अज्ञात” बताया गया है।
बीमारी का नाम अब तक क्यों नहीं बताया गया?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी मौतों के बाद भी बीमारी का स्पष्ट कारण क्यों नहीं बताया गया?
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) की रिपोर्ट में भी मौत के कारण वाले कॉलम को खाली छोड़ा गया है। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं और आम जनता में डर बढ़ रहा है।
23 मौतों का दावा, 15 मौतें दूषित पानी से?
इस मामले में एक याचिकाकर्ता के वकील विभोर खंडेलवाल ने दावा किया कि अदालत में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने मौखिक रूप से 23 मौतों की बात स्वीकार की, जिनमें से 15 मौतें दूषित पानी पीने से हुईं।
यही नहीं, एमजीएम मेडिकल कॉलेज, इंदौर की समिति द्वारा तैयार की गई ‘मृत्यु लेखापरीक्षा रिपोर्ट’ में भी संकेत दिया गया है कि कम से कम 15 मौतें इस प्रकोप से जुड़ी हो सकती हैं।
सरकार ने क्या कदम उठाए?
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद मुख्य सचिव अनुराग जैन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश हुए और कई अहम जानकारियाँ दीं:
भागीरथपुरा में टैंकरों से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की जा रही है
51 दूषित ट्यूबवेल बंद कर दिए गए हैं
दूषित जल स्रोतों का क्लोरीनीकरण और उपचार किया जा रहा है
क्षेत्र में 1.62 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया
उल्टी-दस्त से प्रभावित 440 मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया गया
इनमें से 411 मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं, जबकि 29 अभी भर्ती हैं
सभी मरीजों का इलाज सरकारी खर्च पर हो रहा है
नई पाइपलाइन और पानी की जांच
मुख्य सचिव ने अदालत को बताया कि भागीरथपुरा में पीने के पानी की लगातार जांच की जा रही है और नई जल पाइपलाइन बिछाने के ठेके भी दे दिए गए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
हाईकोर्ट का अगला कदम
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि:
सभी याचिकाकर्ताओं को सरकार की रिपोर्ट की कॉपी दी जाए
याचिकाकर्ता 19 जनवरी तक अपना जवाब दाखिल करें
मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को होगी
मुख्य सचिव को फिर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होना होगा
निष्कर्ष
इंदौर दूषित पानी मामला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की बड़ी परीक्षा बन चुका है। जब तक बीमारी के असली कारण का खुलासा नहीं होता और स्थायी समाधान नहीं किया जाता, तब तक लोगों का भरोसा बहाल होना मुश्किल है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस मामले में पूरी सच्चाई सामने आएगी।
